भागलपुर रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर लगेंगी दो स्वाइप मशीनें। 


भागलपुर जंक्शन के चार रिजर्वेशन काउंटरों में से दो पर स्वाइप मशीन लगाई जाएगी। रेलवे ने मालदा डिविजन के लिए फिलहाल चार स्वाइप मशीनें भेजी हैं। इनमें से दो मालदा स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर लगाए जाएंगे।
रेल अधिकारियों ने बताया रेलमंत्री ने देश में रेलवे को पहला कैशलेस सिस्टम पर काम करने वाला विभाग बनाने का निर्देश दे रखा है। रेलवे के पास पहले ही अपने फ्रेट कलेक्शन का 95 प्रतिशत कैशलेस है। रिजर्वड कटेगरी में यह 55 प्रतिशत है। जबकि अनरिजर्वड और मंथली पास की बिक्री 100 पसर्ेंट कैश पेमेंट के जरिए होती है। क्योंकि इनके लिए कार्ड से पेमेंट की अनुमति नहीं है।

रेलवे का वर्तमान फोकस रिजर्वेशन काउंटर के माध्यम से आने वाले 45 फीसद कैश को कैशलेस बनाने पर है। यहां दो काउंटरों पर स्वाइप मशीन लगने के बाद लोग कार्ड से पेमेंट कर सकेंगे। जबकि साधारण व मासिक टिकट लेने वालों के लिए मोबाइल एप के माध्यम से पैसे लेने की व्यवस्था भी की जा रही है। वैसे यहां पर टिकट बिक्री को देखते हुए यह भी हो सकता है कि दो मशीनों में से एक को रिजर्वेशन काउंटर पर लगाया जाए और दूसरे को सामान्य टिकट काउंटर पर। ताकि दोनों ओर जो व्यक्ति कार्ड से पेमेंट की इच्छा जाहिर करे उसे यह सुविधा मिल सके। वैसे आने वाले दिनों में सभी काउंटरों पर यह मशीन होगी। इसे लेकर बोर्ड स्तर पर काम हो रहा है।

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सुलझाए जा रहे तकनीकी पेंच

रेल अधिकारियों ने बताया कि अभी स्वाइप मशीनों से टिकट लोग ले सकेंगे पर टिकट वापसी पर राशि उनके अकाउंट में चली जाए यह व्यवस्था मशीनों में नहीं है। इसी कारण मशीनों को यहां इंस्टॉल नहीं किया गया है। मालदा में इस समस्या को दूर कराया जा रहा है। उम्मीद है कि एक हफ्ते में यह समस्या दूर हो जाएगी और मशीनें आ जाएंगी।
कार्ड पेमेंट की होती है पूछताछ

रेलवे के वाणिज्यिक विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रिजर्वेशन काउंटर और सामान्य काउंटर पर अभी रोजाना दर्जनों लोग कार्ड से पेमेंट करने की बात कहते हैं।

वैसे लोग जो लंबी दूरी की टिकट लेते हैं वे चाहते हैं कि कार्ड से ही पेमेंट लिया जाए। उनका तर्क होता है कि एटीएम से कैश तो महज दो हजार ही मिलता है। वहां सौ-पांच सौ के नोट होते नहीं हैं और एक दिन में दो हजार का एक पत्ता मिलता है। यदि किसी को तीन हजार देना हुआ तो वह ताने भी देता है। पर स्वाइप मशीन आने तक हमें यह सुनना पड़ेगा।

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