उम्मीद जगी है कि भागलपुर हवाई अड्डे के रनवे पर भैसों की जगह दिखेगी प्लेन। 


भागलपुर से छोटे विमान उड़ाने की कोशिश कई बार हुई है। तीन वर्ष पूर्व स्काईफिशर कंपनी ने विमान उड़ाने का प्रयास किया था। 24 अप्रैल 2013 को विमान का ट्रायल भी हुआ था। 15 मई से नियमित उड़ान भरना था। विमान कंपनी के निदेशक ऋषिकेश मिश्रा व प्रबंधक विशाल इसे नन शिड्यूल तरीके से चलाना चाहते थे। यह विमान भागलपुर-पटना-गया-वाराणसी के बीच उड़ना था। भागलपुर से उड़ान के लिए यह विमान पटना के स्टेट हैंगर में कई महीनों तक रहा था। विमान कंपनी लैंडिंग चार्ज में कमी करने के लिए डीएम से लेकर राज्य सरकार के नागरिक विमानन निदेशालय तक चक्कर लगाती रही लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। भागलपुर से चलाने के लिए 12 सीटों का यह विमान अमेरिका से मंगाया गया था। इसका नाम कैसिना ग्रांट कारावान था। इसका निर्माण कैसिनो एयर क्राफ्ट कंपनी ने किया था। विमान के ट्रायल में कंपनी को उस समय करीब 75 हजार रुपये जमा करने पड़े थे। इधर, जिला पदाधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि उनके डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में किसी विमानन कंपनी ने ऑफर नहीं किया है। लेकिन इसके पूर्व दो विमानन कंपनियों ने हवाई जहाज उड़ाने की पेशकश की थी। 2007-08 में पूर्व नागरिक विमान मंत्री शाहनवाज हुसैन के प्रयास से कोलकाता से एयरपोर्ट ऑथरिटी ऑफ इंडिया की टीम यहां आई थी और हवाई अड्डे की नापी की थी। इस टीम ने माना था कि हवाई अड्डा अपेक्षाकृत छोटा है। यहां से अधिकतम 40 सीटों वाला विमान उड़ सकता है। हालांकि उन्होंने 4000 गुणा 150 वर्गफीट जमीन की आवश्यकता जताई थी। नापी में यहां की जमीन 3300 गुणा 150 वर्गफीट मिली थी।

इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुकुटधारी अग्रवाल कहते हैं कि 1970 के दशक में कलिंगा का 40 सीटों वाला विमान कोलकाता से भागलपुर और मुजफ्फरपुर से रक्सौल के बीच चलता था। विमान सेवा किसी कारण से बंद हो गई।

अग्रवाल कहते हैं कि उनके संगठन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी इसके लिए पहल की थी लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को नकार दिया गया था।

जिला पदाधिकारी आदेश तितरमारे ने कहा कि लैंडिंग चार्ज कम होने से सिल्क व्यवसाय व चिकित्सा जगत में क्रांति आएगी। इस्टर्न बिहार चेम्बर ऑफ कॉमर्स, इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और नागरिक विकास समिति सहित कई संगठनों ने उनसे मिलकर लैंडिंग चार्ज कम करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि एयर एम्बुलेंस आने से मरीजों को फायदा होगा। दर कम होने से प्रतिदिन विमान चलने का रास्ता खुलेगा। रेल व सड़क मार्ग से देश-विदेश के बड़े सिल्क व्यापारी यहां आना नहीं चाहते हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अब भागलपुर को सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिलों के डॉक्टरों की सेवा मिल सकेगी।

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