पीएम मोदी की नज़र नई पीढ़ी पर, राहुल की नजर संसद में व्यवधान पर:अरूण जेटली। 


नोटबंदी पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के रवैये को आड़े हाथो लेते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि प्रधानमंत्री जहां नयी पीढ़ी के बारे में सोचते हैं, वहीं राहुल गांधी केवल संसद के अगले सत्र में व्यवधान के बारे में ही सोचते हैं. दूसरी ओर भारी तादाद में पुराने
नोट बैंकों में वापस आने को लेकर हो रही आलोचना पर जेटली ने चेताया का बैंक में पैसा जमा कर देने भर से काला धन सफेद नहीं हो जाता.

नोटबंदी के ठीक दो महीने पूरे होने पर सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर लिखे अपने ब्लॉग में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस को खूब खरी खोटी सुनायी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके विरोधियों में बहुत बड़ा अंतर है.

– प्रधानमंत्री भविष्यदृष्टा है. वो एक आधुनिक और तकनीक आधारित स्वच्छ अर्थव्यवस्था के बारे में सोचते हैं.

– अब वो राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की व्यवस्था को स्वच्छ बनाने के बारे में बोल रहे हैं.

– वहीं उनके विरोधी एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें नगद का बोलबाला हो.

नोटबंदी के चलते संसद के शीतकालीन सत्र में कामकाज करीब-करीब ठप रहा. अब बजट सत्र में भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं दिख रही. इसी के मद्देनजर जेटली ने तंज कसा कि प्रधानमंत्री जहा अगली पीढ़ी के बारे में सोचते हैं, वहीं राहुल गांधी केवल यही सोचते हैं कि संसद के अगले सत्र में कैसे व्यवधान डाला जाए.

नोटबंदी की वजह से 15.44 लाख करोड़ रुपये के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बाहर कर दिए गए. शुरू में सरकार का अनुमान था कि इसमे से करीब तीन लाख करोड़ रुपये वापस नहीं आएंगे. लेकिन अलग-अलग स्रोत्रों से जानकारी आ रही है कि 14 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम वापस आ गयी है. इसके चलते सरकार की तीखी आलोचना हो रही है कि काला धन आखिर था कहां. इस पर जेटली ने कहा कि

– बैंक में भारी तादाद मं पैसा जमा कराने का मतलब ये है कि नहीं कि वो सभी सफेद धन है. बैंक में जमा कर देने भर से ही काला धन सफेद नही हो जाता.

– इसके उलट स्थिति ये है कि अब पैसे के मालिक का पता चल गया है. ऐसे में राजस्व विभाग को इन पैसे पर टैक्स लगाने का अधिकार मिल जाएगा.

– दूसरी ओर आयकर कानून में फेरबदल के बाद काले धन पर भारी टैक्स और जुर्माना लगाना संभव हो सकेगा.

जेटली ये भी दावा कर रहे हैं कि तकलीफ और असुविधा का दौर खत्म हो रहा है. आर्थिक गतिविधियां वापस अपनी पटरी पर आ रही हैं. बैंकों के पास कम लागत के संसाधन मौजूद हैं जिससे उनके लिए कर्ज सस्ता करना मुमकिन हो सकता है. इन सब से अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर पड़ेगा और आने वाले दिनों में विकास दर तेजी से बढ़ेगी.

नगद आधारित अर्थव्यवस्था की आलोचना करते हुए जेटली ने कहा कि व्यवस्था में ज्यादा नगदी जहां भ्रष्टाचार, जाली नोट और आतंकवाद को बल मिलता है, वहीं टैक्स चोरी को भी बढ़ावा मिलता है. जेटली का मत है कि

– जब टैक्स चोरों से ज्यादा टैक्स वसूली जाएगी तो बाकियों पर टैक्स का बोझ कम पड़ेगा.

– व्यवस्था में नगदी कम होने से अपराध और आतंकवाद खत्म तो नहीं होंगे, लेकिन उनपर मार जरुर पड़ेगी.

– ऐसे कई उदाहरण हैं जो बताते हैं कि बाजार से भारी नगदी अपने आप कम नहीं होती. सरकार को ही कागजी नोट कम करने के उपाय करने पड़ते हैं.

जेटली की इन बातों से साफ है कि बाजार से जितनी नगदी निकाली गयी है, उतनी पूरी के पूरी वापस नहीं डाली जाएगी. इन्ही कारणों से अभी भी बैंक से पैसा निकालने के मामले में कुछ पाबंदियां दो महीने बाद भी जारी है और इसमें रियायत के लिए कुछ और समय इंतजार करना होगा.

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