अलग-अलग कप्तानी टीम इंडिया के लिए फिट नहीं, मैंने विराट के तैयार होने तक इंतजार किया, फिर कैप्टेंसी छोड़ी : धोनी। 


वनडे और T20 की कैप्टेंसी छोड़ने के बाद महेंद्र सिंह धोनी शुक्रवार को पहली बार मीडिया के सामने आए। पुणे के एमसीए स्टेडियम में उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के वक्त से ही मुझे लगता है कि भारत में स्प्लिट कैप्टेंसी यानी तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तानी काम नहीं करती। उन्होंने कहा,”मैं सही वक्त का इंतजार कर रहा था। मैं चाहता था कि विराट टेस्ट फॉर्मेट की कप्तानी में आसानी से ढल जाएं। विराट हमेशा से तैयार थे और मुझे लगा कि ये सही वक्त है उन्हें ये जॉब सौंपने का।” पढ़ें,धोनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 7 बड़ी बातें…

1# कप्तानी छोड़ने के बारे में कब सोचा?
-धोनी ने कहा,”मेरे लिए भारत में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज आखिरी थी। यही वजह थी कि मैं जिम्बाब्वे भी गया। हमारे माहौल में स्प्लिट कैप्टेंसी ज्यादा काम नहीं करती है। और,टेस्ट से संन्यास के बाद भी मेरे इस विचार में कोई बदलाव नहीं आया। इंडिया के हिसाब से देखा जाए तो एक कैप्टेन का फॉर्मूला ही ज्यादा काम करता है। लिमिटेड ओवर कैप्टेंसी बड़ा चैलेंज नहीं है और विराट इसके लिए अब तैयार हैं।”
-”हमारे सेटअप में स्प्लिट कैप्टेंसी ज्यादा काम नहीं कर सकती। लोग चर्चा करते हैं कि कौन अच्छा कैप्टन है और कौन खराब कैप्टन है। मुझे लगता है कि मौजूदा टीम में तीनों फॉर्मेट में जीतने का दम है।”
-बता दें कि धोनी ने पिछले हफ्ते ही वनडे और T20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया था। इससे पहले दिसंबर 2014 में वे टेस्ट की कप्तानी छोड़ चुके थे।

2# क्या पूरी तरह तैयार हैं विराट?
-धोनी ने कहा,”विराट हमेशा ऐसा खिलाड़ी रहा जो इम्प्रूव करना चाहता है और कंट्रीब्यूट करना चाहता है। इसीलिए आज वो इतना कामयाब है। अच्छा करने की जो चाह है और खुद को इम्प्रोवाइज करने की उसकी जो आदत है,वो विराट को काफी अलग बनाती है। इसलिए जो उसे जरूरत थी,वो मैंने दिया।”

3# विराट को किस तरह मेंटर करेंगे?
-अगर मैं 100 सजेशन उसे देता हूं और वो 100 को मना कर देता है तो मुझे परेशान नहीं होना चाहिए। जरूरी ये है कि इसी तरह का रिलेशन टीम में हो कि अगर मैं सजेशन दूं तो उसे इम्प्लीमेंट करने की उस पर मजबूरी ना हो। और,मैं भी ये उम्मीद ना करूं कि मेरे हर सजेशन को वो मानेगा ही।”
-”ये अब विराट के ऊपर है कि वो सजेशन और खिलाड़ियों को किस तरह इस्तेमाल करता है। मैं विकेट के पीछे से उसे सलाह देता रहूंगा।”
-”कैप्टन का सबसे अहम जो काम होता है वो खिलाड़ी के पोटेंशियल का मैच में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करे। सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि उस खिलाड़ी में आपको कॉन्फिडेंस जगाना होता है ताकि वो परफॉर्म कर सके।”

4# अपने बैटिंग ऑर्डर के बारे में क्या कहा?
-धोनी ने कहा,”क्रिकेटर के तौर पर काफी कुछ बदल गया है। टीम की जो जरूरत थी,उसमें काफी बदलाव आ गया है। पहले मैंने नीचे बैटिंग की। फिर मैं ऊपर बैटिंग करने लगा। फिर ऊपर के ऑर्डर पर अाने वाले बैट्समैन अच्छा करने लगे तो लोअर ऑर्डर में अच्छे फिनिशर की जरूरत थी। इसलिए टीम की जरूरत के हिसाब से मैंने बैटिंग ऑर्डर तय करना शुरू कर दिया।”
-”मेरे लिए जरूरी है कि टीम जीते। 4,5,6 या सात जिस नंबर पर टीम को जरूरत हो मैं बैटिंग करने के लिए तैयार हूं।”

5# टीम में अपने रोल के बारे में क्या बोले?
-धोनी ने कहा,”विकेटकीपर हमेशा टीम का वाइसकैप्टेन होता है। और विकेटकीपर को ये ओहदा मिला हो या ना मिला हो,वो फील्ड सेटिंग में बड़ा रोल अदा करता है। मैं विकेट के पीछे मौजूद रहूंगा और जितनी मदद विराट की कर सकता हूं और सलाह दे सकता हूं वो मैं करूंगा। बतौर विकेटकीपर आपका पता होता है कि बैट्समैन क्या पोजिशन ले रहा है,बॉल किस तरह घूम रही है।”

6# मौजूदा टीम के बारे में क्या बोले?
-धोनी ने कहा,”मौजूदा टीम ऐसी है जो हर मैच जीतना चाहती है। इस टीम में अच्छे बॉलर हैं। अगर कोई इंजर्ड होता है तो हमारे पास बैकअप है। मैंने उस टीम को लीड किया है,जिसमें अच्छा परफॉर्म करने वाले खिलाड़ी रहे हैं। ये अभी यंग हैं,लेकिन इन्होंने काफी क्रिकेट खेला है। इन्होंने अंडरप्रेशर क्रिकेट खेला है।”

7# जिंदगी में कोई पछतावा तो नहीं?क्या बाल बढ़ाएंगे?
-धोनी ने कहा,”मैं जिंदगी में कभी भी पछतावा नहीं करता। ये मेरे लिए एक जर्नी की तरह है। मैं अच्छे पीरियड से भी गुजरा और बुरे पीरियड से भी। जब सीनियर्स गए तो नए प्लेयर्स आए। उन्होंने खुद को साबित किया।”
-”…और बाल तो अब बड़े नहीं होंगे।”

धोनी के अचीवमेंट्स
-धोनी भारत को सबसे ज्यादा मैचों में जीत दिलाने वाले कप्तान हैं।
-उनकी कप्तानी में भारत ने 110 वनडे,41 टी20 और 27 टेस्ट जीते।
-ODI वर्ल्ड कप 2011,T20 वर्ल्ड कप 2007 और चैम्पियंस ट्राॅफी में जीत दिलाई। टेस्ट में टीम को नंबर वन बनाया।
-धोनी की लीडरशिप में इंडिया दिसंबर 2009 में टेस्ट की नंबर वन टीम बनी। उन्होंने 27 टेस्ट में जीत दिलाई।

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